बचपन में देखा सपना, संघर्ष से बनी हकीकत” – एक महिला IAS अफसर की अनसुनी कहानी

जब भी कोई लड़की किसी छोटे शहर या गांव से निकलकर IAS जैसी प्रतिष्ठित सेवा में अपना नाम दर्ज कराती है, तो वह सिर्फ खुद की नहीं, बल्कि हजारों लड़कियों की उम्मीदों को पंख देती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है उस महिला की जिनकी मेहनत और लगन की आज हर ओर चर्चा हो रही है।

राजस्थान के एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस महिला IAS अधिकारी की सफलता ने न सिर्फ प्रशासनिक सेवाओं की दुनिया में हलचल मचा दी है, बल्कि देशभर की लड़कियों को यह यकीन भी दिलाया है कि “सपने किसी शहर के नहीं, हौसलों के होते हैं।”


📍 कहां से है ये महिला अधिकारी?

इस महिला अधिकारी का संबंध राजस्थान के बीकानेर संभाग से है। एक ऐसे क्षेत्र से, जहां संसाधन सीमित हैं, पढ़ाई का माहौल चुनौतीपूर्ण है, और लड़कियों को उच्च शिक्षा दिलवाना अब भी एक संघर्ष जैसा महसूस होता है।

इन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता था कि ये एक दिन देश की सबसे कठिन परीक्षा – UPSC (IAS) को न सिर्फ पास करेंगी, बल्कि एक मिसाल भी बनेंगी।


👧 शुरुआती जीवन और परिवारिक पृष्ठभूमि

इस महिला अफसर का बचपन सामान्य रहा। उनके पिता एक सरकारी कर्मचारी थे और मां गृहिणी। बचपन से ही पढ़ाई में तेज़ रहीं, लेकिन संसाधनों की कमी, गांव की सामाजिक सोच और आर्थिक बाधाओं ने कई बार उनके सपनों की राह में रोड़े अटकाए।

उन्होंने स्थानीय सरकारी स्कूल से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई की। किताबें पुरानी थीं, लाइब्रेरी सीमित थी, लेकिन इरादे मजबूत थे।


🎯 कैसे लिया UPSC की ओर पहला कदम?

कॉलेज के दौरान ही उन्होंने IAS बनने का सपना देखना शुरू किया। उन्हें जब पहली बार पता चला कि एक IAS अधिकारी का काम सिर्फ अफसरशाही नहीं, बल्कि समाज को बदलना होता है—वहीं से उन्होंने ठान लिया कि यही उनका रास्ता है।

उन्हें न कोई महंगी कोचिंग मिली, न ही बड़ा शहर। उन्होंने स्व-अध्ययन (Self-Study) के दम पर UPSC की तैयारी शुरू की। YouTube वीडियो, NCERT किताबें, अख़बार और खुद की बनाई रणनीति से उन्होंने धीरे-धीरे अपना बेस मजबूत किया।


📚 पढ़ाई का तरीका और टाइम टेबल

उनका अध्ययन शैली बिलकुल व्यावहारिक और अनुशासित था:

  • रोज़ाना 8–10 घंटे की पढ़ाई
  • अख़बार और करेंट अफेयर्स की गहराई से समझ
  • NCERT से लेकर स्टैंडर्ड बुक्स तक विस्तार से नोट्स
  • हर रविवार मॉक टेस्ट देना अनिवार्य
  • अपने जवाबों की खुद समीक्षा करना

उनका मानना है:

“UPSC में सबसे ज़रूरी होता है ‘आत्म-समीक्षा’। आपको खुद अपनी गलतियों को पहचानना और सुधारना होगा।”


❌ संघर्ष और असफलताएं

IAS बनने का सफर आसान नहीं होता, और उनके लिए तो और भी चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने बताया कि पहली दो बार की कोशिशों में वे प्रीलिम्स तक भी नहीं पहुंच पाईं। कई बार लगा कि शायद यह सपना अधूरा ही रह जाएगा।

लोगों ने कहा – “लड़की होकर क्या कर पाएगी?”, “शादी कर लो, सरकारी नौकरी की ज़रूरत नहीं”, लेकिन उन्होंने एक बात कभी नहीं छोड़ी – सपना देखना और उस पर मेहनत करना

तीसरी बार जब उन्होंने UPSC की परीक्षा दी, तब जाकर सफलता उनके कदम चूमने लगी।


🏆 आखिरकार मिली सफलता

तीसरी कोशिश में उन्होंने UPSC परीक्षा पास की और शानदार रैंक हासिल की। ट्रेनिंग के बाद जब वे अपनी पोस्टिंग पर गईं, तो गांव की वही लड़कियाँ जो पहले चुपचाप उन्हें देखती थीं, अब कहती थीं:

“दीदी, हम भी आपकी तरह बनना चाहते हैं।”

उनकी कहानी अब हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है, जो सीमित साधनों और समाज की बंदिशों के बावजूद बड़े सपने देखती है।


🙌 समाज में लाया बदलाव

अब वे जिस भी जिले में कार्यरत हैं, वहां बालिकाओं की शिक्षा, महिला सुरक्षा, और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका बेहद सराहनीय रही है।

  • उन्होंने स्कूलों में “बेटी पढ़ाओ” अभियान को नई दिशा दी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कन्या शिक्षा को लेकर कई अभिनव पहल की।
  • हर महिला शिकायत को प्राथमिकता देकर समाधान की दिशा में कार्य किया।

लोग उन्हें “लोगों की अफसर” कहते हैं – जो सिर्फ कुर्सी पर नहीं, जमीनी स्तर पर काम करती हैं।


👩‍🎓 लड़कियों के लिए संदेश

इस महिला IAS अधिकारी का मानना है:

“अगर आपके पास सपना है और खुद पर भरोसा है, तो कोई भी ताकत आपको रोक नहीं सकती। UPSC सिर्फ एक परीक्षा नहीं, एक मानसिक युद्ध है।”

उन्होंने लड़कियों को सलाह दी:

  • आत्मनिर्भर बनें
  • शिक्षा को कभी न छोड़ें
  • सोशल मीडिया से दूर रहकर फोकस बढ़ाएं
  • हर असफलता से सीखें, हार मानना नहीं सीखें

📢 उनके कुछ मोटिवेशनल कोट्स:

🔸 “कभी हालात को दोष मत दो, हालात तो बनते ही हैं मजबूत लोगों की पहचान के लिए।”
🔸 “जो खुद से लड़ता है, वही एक दिन दुनिया से जीतता है।”
🔸 “शुरुआत भले छोटी हो, पर सपने बड़े रखें।”


📊 आंकड़ों में सफलता

वर्षप्रयास संख्यास्टेज तक पहुँचींरिजल्ट
पहला प्रयास1stप्रीलिम्स फेलअसफल
दूसरा प्रयास2ndमेन्स तक पहुँचींअसफल
तीसरा प्रयास3rdइंटरव्यू क्लियरचयनित (IAS)

📝 निष्कर्ष

यह कहानी सिर्फ एक महिला IAS अधिकारी की नहीं, बल्कि उस जज़्बे की है जो छोटे शहरों की गलियों से निकलकर देश की शीर्ष सेवा तक पहुंचता है। यह उस भरोसे की कहानी है जो हर बेटी को उसकी ताकत याद दिलाता है।

अगर आपने भी कभी “मैं भी कुछ बड़ा करूंगी” सोचा है—तो आज से शुरुआत करें। किसी कोचिंग की ज़रूरत नहीं, बस इरादों की कोचिंग चाहिए।


✍️ आपका अगला कदम?

💬 क्या आपने भी कभी IAS बनने का सपना देखा है?
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sam

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