मोहम्मद शमी पर कोलकाता हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी व बेटी के लिए हर महीने 4 लाख की अलिमनी


भारतीय फास्ट बॉलर मोहम्मद शमी के जीवन में फिलहाल एक कानूनी मोड़ सामने आया है। कोलकाता हाई कोर्ट ने उन्हें उनकी अलगाव में चल रही पत्नी हसीन जहां और बेटी आइरा के लिए हर महीने ₹4 लाख देने का आदेश दिया है—जिसमें ₹1.5 लाख पत्नी और ₹2.5 लाख बेटी के लिए केंद्रीय भूमिका में रखे गए हैं।
यह फैसला न सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय न्याय-प्राप्ति, महिला-पश्चात दायित्व, और उच्च-आय वालों के आर्थिक उत्तरदायित्व पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
1. 🧾 मामला क्या है?
🧬 पारिवारिक पृष्ठभूमि (2014–2025)
- शमी और हसीन ने 2014 में विवाह किया, और 2015 में उनकी बेटी आइरा का जन्म हुआ ।
- 2018 में हसीन ने घरेलू हिंसा, दहेज कार्यवाही और शमी पर मैच-फिक्सिंग के आरोप लगाए। तब शमी का केंद्रीय अनुबंध रखा गया था, लेकिन बाद में स्थिति साफ हुई ।
👩⚖️ कानूनी लड़ाई
- 2023 में जिला न्यायालय ने शमी को ₹50,000 पत्नी और ₹80,000 बेटी को देने को कहा।
- हसीन ने इसे निचली अदालत का जवाब मानकर कोलकाता हाई कोर्ट में अपील की
📅 उच्च न्यायालय का आदेश (1 जुलाई 2025)
- हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी ने आदेश जारी किया—₹1.5 लाख हसीन के लिए और ₹2.5 लाख बेटी के लिए, कुल ₹4 लाख प्रति माह, तब तक जब तक मुख्य मुकदमा चलता है ।
- कोर्ट ने कहा कि शमी की आय (₹7.19 करोड़ वार्षिक, लगभग ₹60 लाख/माह) को देखते हुए यह उचित और न्यायसंगत है
- साथ ही यह स्पष्ट किया कि अतिरिक्त खर्च–जैसे शिक्षा या स्वास्थ्य–के लिए शमी स्वेच्छा से अधिक भुगतान कर सकते हैं ।
2. ⚖️ न्यायिक तर्क और औचित्य
✅ वित्तीय क्षमता का आंकलन
कोर्ट ने ध्यान दिया कि:
- शमी की मासिक आय लगभग ₹60 लाख है—यानी ₹4 लाख का आदेश उनकी आय का मात्र 6.6% है, जो अत्यधिक नहीं कहा जा सकता
- निचली अदालत का आदेश बहुत कम था, जिसकी समीक्षा आवश्यक थी ।
👩👧 हसीन और बेटी की आर्थिक स्थिति
- हसीन पहले मॉडल थीं और फिल्मी दुनिया में काम करती थीं, लेकिन शमी ने उन्हें गृहिणी बनने पर बाध्य किया ।
- अब वह सारा खर्च शमी पर निर्भर हैं, और उन्हें व बेटी को एक ऑटोनॉमस—वित्तीय स्तर पर सुरक्षित—जीवन चाहिए।
- अदालत ने कहा कि बेटी को पिता की आय के अनुरूप सुविधाएँ मिलनी चाहिए ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रहे ।
3. 🔄 क्या बदला है — पिछला बनाम नया आदेश
विवादाधीन पक्ष | निचली अदालत (2023) | हाई कोर्ट (2025) |
---|---|---|
पत्नी हसीन | ₹50,000 | ₹1,50,000 |
बेटी आइरा | ₹80,000 | ₹2,50,000 |
कुल अलिमनी | ₹1,30,000 | ₹4,00,000 |
हाई कोर्ट ने निचली अदालत को “अपूर्ण और निष्ठुर” कहा और इसे आर्थिक असंतुलन प्रस्तुत किया।
4. 🗣️ हसीन जहां की प्रतिक्रिया
- उन्होंने ANI से कहा कि “शमी ने उन्हें मॉडलिंग छोड़ने पर मजबूर किया। अब न तो उनका रोजगार है न कोई आय स्रोत।”
- उन्होंने बताया, “वह केवल गृहिणी बनीं, लेकिन अब उनके पास कोई कमाई नहीं है।”
- यह निर्णय पढ़कर उन्होंने कहा कि न्याय हुआ और अब बेटी को अच्छे स्कूल व भविष्य की सुविधाएँ मिलेगी ।
5. 🕊️ शमी का रुख
- शमी ने अभी तक इस आदेश का सार्वजनिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन पहले उन्होंने हसीन की शिकायतों को “भ्रांतिपूर्ण” बताया था
- वे आरोप लगा चुके हैं कि उनके खिलाफ कोई साजिश रची जा रही है।
- हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शमी अतिरिक्त शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चे सुनियोजित तरीके से स्वेच्छा से दे सकते हैं ।
6. 🧩 सामाजिक, कानूनी और आर्थिक महत्व
⚖️ महिला अधिकारों की रक्षा
- अदालत ने स्पष्ट किया कि गृहिणी जीवन शैली चुनने का मतलब आर्थिक व अधिकारों का त्याग नहीं है। पति की जिम्मेदारी अदालत द्वारा सुनिश्चित की गई।
👪 बालिका हेतु संरक्षित भविष्य
- पिता की आय के अनुसार बेटी की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित होना आवश्यक है—जो अदालत ने सुनिश्चित किया।
🧮 न्याय और धन-प्रबंधन
- न्याय व्यवस्था ने बड़े अंतर को सुलझाया—जहाँ निचली अदालत सीमित राशि दे रही थी, उच्च न्यायालय ने उसे संशोधित कर पर्याप्त भूमिका सौंपी।
7. ⚠️ आलोचनाएँ और आलोचक दृष्टिकोण
🔍 “क्या ₹4 लाख उचित है?”
कुछ लोग पूछ रहे हैं कि क्या ₹4 लाख कम या ज्यादा है—लेकिन कोर्ट ने वित्तीय दृष्टिकोण, बेटी की भविष्य-ध्यान और पत्नी की जीवनशैली की तुलना देखी है।
💰 “आर्थिक दबाव”
कुछ आलोचक सोच सकते हैं कि शमी पर यह अतिरिक्त भार पड़ेगा—लेकिन शमी की आय के पहले से प्रचुर होने की वजह से आदेश तार्किक प्रतीत होता है।
8. 🧠 विशेषज्ञ विश्लेषण
- वित्तीय और महिला-सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि यह आदेश समय की मांग थी—ताकि हसीन और बेटी को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिले।
- पारिवारिक कानून विश्लेषकों ने इसे ऐसे मामलों में “न्याय सुनिश्चित करने वाला” कदम माना है, जहां अंतर बहुत बड़ा हो।
9. 🔮 आगे की राह: भविष्य में संभावनाएँ
- मुख्य मुकदमे की सुनवाई अब छह महीने के भीतर होनी है—और आदेश को अंतिम रूप दिया जा सकता है या संशोधित किया जा सकता है ।
- शमी यदि अतिरिक्त शिक्षा या स्वास्थ्य खर्चे देते हैं, तो उन्हें स्वीकार किया जाएगा।
- यह फैसले प्रोफेशनल खेल जगत में वित्तीय जिम्मेदारी की नई मिसाल सेट करते हैं।
10. 📌 निष्कर्ष
- अदालत ने आर्थिक न्याय सुनिश्चित करते हुए पत्नी और बेटी को मौजूदा जीवनशैली के अनुरूप समर्थन दिया है।
- यह आदेश न केवल शमी के परिवार के लिए, बल्कि सामूहिक स्तर पर महिला अधिकारों और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक मिसाल है।
- यह दर्शाता है कि कानून नहीं भूलता—भले ही पैसे हो, जिम्मेदारी समान होनी चाहिए।
💬 आपके विचार?
- क्या आपको यह राशि सही लगती है?
- क्या शमी को बेटी-वाली शिक्षा या भविष्य खर्चों पर अतिरिक्त योगदान होना चाहिए?
- ऐसे मामलों में समाज किस हद तक कानून का साथ देता है?
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