राजस्थान वालों के लिए बड़ी खबर! 27 जून को सरकारी दफ्तरों में आधे दिन की छुट्टी, जानिए क्या है वजह और कौन रहेगा इसका फायदा उठाने वाला!

इसका फायदा उठाने वाला!अगर आप राजस्थान के उदयपुर में सरकारी नौकरी करते हैं, तो ये खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ले आएगी। आखिर किसे छुट्टी पसंद नहीं होती? और जब वो भी आधे दिन की छुट्टी हो, वो भी अचानक से… तो भला कौन नहीं खुश होगा? जी हां, राजस्थान के उदयपुर जिले के कर्मचारियों के लिए 27 जून 2025 को दोपहर बाद छुट्टी का ऐलान हो गया है।और इसकी वजह भी उतनी ही खास है, जितना ये तोहफा।
आखिर क्यों दी जा रही है ये छुट्टी?
अब आप सोच रहे होंगे, अचानक ये हाफ डे क्यों? तो जनाब, कारण है भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा।हर साल की तरह इस साल भी उदयपुर में जगन्नाथ जी की रथ यात्रा बड़े धूमधाम से निकाली जाएगी। इसे लेकर इतनी भारी भीड़ उमड़ती है कि प्रशासन ने फैसला लिया कि 27 जून को आधे दिन के बाद सभी सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे, ताकि ना तो कामकाज प्रभावित हो और ना ही लोग ट्रैफिक और भीड़ में फंसे रहें।

किस समय से लागू होगी छुट्टी?
कलेक्टर नमित मेहता के आदेश के अनुसार, 27 जून को दोपहर 1:30 बजे के बाद से सभी सरकारी दफ्तरों में कामकाज बंद रहेगा। यानी सुबह की शिफ्ट पूरी कीजिए और फिर लीजिए चैन की सांस। ऑफिस बैग बंद और सीधा निकल जाइए रथ यात्रा देखने, अगर मन हो तो।
ध्यान दीजिए – ये छुट्टी पूरे राजस्थान में नहीं है!
ये बात बहुत साफ है कि ये छुट्टी सिर्फ और सिर्फ उदयपुर जिले के लिए है। बाकी जिलों में ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। तो अगर आप कोटा, जयपुर, बीकानेर या जोधपुर से ये ब्लॉग पढ़ रहे हैं, तो माफ कीजिए, ये खुशखबरी आपके लिए नहीं है।
रथ यात्रा का इतिहास और महत्व
अब बात करते हैं असली वजह की रथ यात्रा। उदयपुर में रथ यात्रा कोई साधारण जुलूस नहीं होती, बल्कि एक ऐसा आयोजन होता है जिसमें श्रद्धा, संस्कृति और उत्साह तीनों का संगम देखने को मिलता है।भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की विशाल झांकियों को सजे हुए रथों पर पूरे शहर में घुमाया जाता है। भक्त उन्हें खींचते हैं, आरती गाते हैं, नाचते-गाते आगे बढ़ते हैं। हर गली. हर नुक्कड़ में मानो पूरा शहर भगवान के रंग में रंग जाता है।
कहां-कहां से गुजरेगी रथ यात्रा?
इस बार की यात्रा दोपहर 3 बजे शुरू होगी जगदीश मंदिर से। वहां से यात्रा निकलेगी और होते हुए पहुंचेगी:घंटाघर बड़ा बाजार भादभुजा घाटीफिर वापस मंदिरइसके अलावा, एक अन्य रथ यात्रा अखाड़ा मंदिर से भी निकाली जाएगी जो परंपरागत रास्तों से होकर गुज़रेगी। और हां, सवीना क्षेत्र से भी एक यात्रा निकलेगी। मतलब पूरा शहर रथ यात्रा के रंग में डूबा रहने वाला है।
सुरक्षा के तगड़े इंतज़ाम
इतनी बड़ी भीड़ और आयोजन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह तैयार है। पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल और कलेक्टर मेहता ने मिलकर एक हाई लेवल मीटिंग की है। हर मोड़, हर गली पर पुलिस की तैनाती होगी, सीसीटीवी से निगरानी होगी, ट्रैफिक को डायवर्ट किया जाएगा और मेडिकल टीम भी तैनात रहेगी।मतलब आपकी सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है, आप बस भाव में बह जाइए।
बाजारों और दुकानों में तैयारियां जोरों पर
उदयपुर के बाजार इस समय किसी त्योहार जैसे चमक रहे हैं। दुकानदारों ने अपनी दुकानों को रथ यात्रा की थीम पर सजाना शुरू कर दिया है। झांकियों की रिहर्सल चल रही है। बच्चों के स्कूलों में रथ यात्रा से जुड़ी गतिविधियां करवाई जा रही हैं। पूरा शहर मानों एक रंगमंच बन चुका है।
पहले क्या था प्लान, अब क्या बदला?
आपको जानकर दिलचस्प लगेगा कि पहले 24 जुलाई को हरियाली अमावस्या और 3 सितंबर को फल्गुनी एकादशी के दिन स्थानीय अवकाश घोषित किया गया था। लेकिन अब संशोधित आदेश में कहा गया है कि 24 जुलाई को भी आधे दिन की छुट्टी होगी, ठीक उसी तरह जैसे 27 जून को होगी।यानी अब से ऐसे पर्वों पर आधे दिन की छुट्टी देना ही नियम बन सकता है।
आम लोगों से अपील
प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि रथ यात्रा के दौरान सहयोग करें। भीड़ में अफरा-तफरी ना करें, अफवाहों पर विश्वास ना करें, ट्रैफिक पुलिस की मदद करें और अपने बच्चों का खास ध्यान रखें।अगर आप इस आयोजन का हिस्सा बन रहे हैं, तो याद रखिए आपका अनुशासन ही शहर की सुंदरता है।
कर्मचारियों की प्रतिक्रियाएं
सरकारी दफ्तरों में इस खबर के बाद से ही चाय की चुस्कियों के साथ मुस्कुराहटें भी परोसी जा रही हैं। कुछ लोग पहले से ही योजना बना चुके हैं कि इस छुट्टी का क्या करें कोई रथ यात्रा देखने जाएगा, कोई फैमिली टाइम बिताएगा और कोई थोड़ी देर ज्यादा सोने का प्लान बना रहा है।
निष्कर्ष
कभी-कभी प्रशासन का एक छोटा सा फैसला, लोगों के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला देता है। 27 जून को आधे दिन की छुट्टी सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि ये एक सामाजिक और धार्मिक समझदारी का भी उदाहरण है।उदयपुर एक बार फिर दिखा रहा है कि आस्था, संस्कृति और प्रशासनिक सोच जब एक साथ चलते हैं, तो नज़ारा वाकई शानदार होता है।
आपके लिए सवाल
आपके शहर में ऐसे आयोजनों के लिए छुट्टी मिलनी चाहिए या नहीं? क्या आपका ऑफिस ऐसा आदेश जारी करता है? नीचे कमेंट करके बताइए। और हां, अगर आप उदयपुर में रहते हैं तो इस पोस्ट को शेयर जरूर करें ताकि आपके साथी कर्मचारियों को भी समय से ये शानदार खबर मिल जाए।